रिमझिम बरसती इन बुंदोंने भी इक किस्सा सुनाया था कभी...बादलों के बिच हुए गडगडाते झगडे का किस्सा.... इसी दौरान चंचल बिजली का चुपकेसे धरती मां के पैर छुनेका किस्सा....सात रंग मे नहाये सतरंगी का किस्सा.. और..और.. और हां कुछ दिवानो के किस्से भी तो थे उसमे.... एक किस्सा सुनाते सुनाते न जाने कितना कुछ बता गयी वो बारीश....और बहोत कुछ अनकहा भी शायद.. सहमे हुए दिलमे टपटपाते हजारो ख्वाईंशोंकी आवाज शायद इसी रिमझिम ने तो सुनी थी...शायद आज ये किस्सा भीसुनायेगी और कही..

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