ज़िंदगी जीने के लाख बहाने शायद
एक बहना तो ये भी होता
आधे अधूरे बेबस जवाबों को
उनके सवालों के हाथ सौपना होता
इक तिनकेसी लगती जिंदगी तब
जब सारे सवालोंके ख़त्म होते भी
एक जवाब फिरभी बाक़ी रहता
अनचाहा .. अटपटा .. अटकसा जवाब ..
कुछ नहीं तो एक सवाल ही उधार दे दे मौला
एक बहना तो ये भी होता
आधे अधूरे बेबस जवाबों को
उनके सवालों के हाथ सौपना होता
इक तिनकेसी लगती जिंदगी तब
जब सारे सवालोंके ख़त्म होते भी
एक जवाब फिरभी बाक़ी रहता
अनचाहा .. अटपटा .. अटकसा जवाब ..
कुछ नहीं तो एक सवाल ही उधार दे दे मौला
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